Meaning of Independence Day, Now-a-days : A Poem

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Happy Independence Day Udaipurites. Presenting before you a poem by Mr. Lokesh Devpura, which depicts the actual meaning of this auspicious day, now-a-days. Bitter, but a reality. Do read it and respond.

“आज़ादी का दिन है भैया; किसी भी समारोह मे हम नहीं बैठने वाले है,
बच्चे जाए इस्त्री-पोलिश करके कपड़े-जूतों पर; हम तो आराम से लेटने वाले है…
चलो आओ! आज छुट्टी के दिन लंबी-लिस्ट लेके, सारे बचे हुए काम निपटा दे,
सब्जी वाले का, दूध वाले का, पोचे-बर्तन वाली का सारा हिसाब सलटा दे…

5 दिन हो गए, कोई धोबी के यहाँ से कपड़े तो ले आओ रे,
15 अगस्त के बहाने दूकान बंद ना कर दे; जरा देख आओ रे!
बिजली का बिल भी चुकाना है, इस एलआईसी-किश्त की भी लास्ट डेट है,
क्या करे, सुबह से शाम तक का प्रोग्राम; कंप्लीट सेट है…
चलो यार, सब कुछ बंद है तो सैलून और पार्लर का काम ही निपटा आते है,
शेव, मसाज, फेशियल और कुछ नहीं तो जरा बाल ही कटा आते है…
एक तरफ श्रीमती को सेंडल, बिंदी का पत्ता, नेल-पेंट दिलाने जाना है,
दूसरी तरफ मम्मी ने कहा कि, “बहू को लेके शाम तक मायके भी जाना है।”
पास-पड़ोसी और बच्चे पिकनिक की ज़िद लगाए बैठे है,
बाकी बड़े-बूढ़े रियलिटी-शो पर नजरे गढ़ाए बैठे है…
कुछ लोगों की महफिल घर पर ही जमी है; पीके वो फुल टाइट है,
देश की चिंता हम क्यों करे? देश का फ्यूचर वैसे ही बहुत ब्राइट है…
ऐसे ही भाग दौड़ मे आज का दिन पूरा बोर जाएगा,
और कल फिर ऑफिस जाने मे भयंकर ज़ोर आएगा…
कल हॉकर अखबार नहीं डालेगा, पर पैसे पूरे लेगा.. ये सोचकर हम परेशान हो रहे है,
भ्रष्टाचार, देशभक्ति, कर्मठता पर घर मे बड़े-बड़े व्याख्यान हो रहे है…
तिरंगे की फोटो तक देखने का वक़्त हमारे पास नहीं है-
हम देश को; आने वाली पीढ़ी को, किस दिशा मे ले जा रहे है?
हमारे पुरखों ने जिस तिरंगे के लिए सर कटा दिया-
उस तिरंगे के आगे हम सर भी नहीं झुका पा रहे है…
आओ कसम खाएँ की इस आज़ादी का और इस तिरंगे का पूरा मान रखेंगे,
हमारी धड़कनों मे सबसे पहले वतन धड़के; इस बात का ध्यान रखेंगे…
जब “जन-गण-मन” की लय गूँजती है, तो एक स्वर मे पूरा हिंढुस्तान डोलता है,
ये माँ और मातृभूमि धन्य हो जाती है, जब एक देशभक्त “भारत-माँ की जय” बोलता है..।”

भारत-माँ की जय…..।

 

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Poem by :
Lokesh Devpura

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