‘‘जीवन की दुकान’’ ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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27 मार्च 2014, उदयपुर। विश्व रंगमंच दिवस के संदर्भ मे उदयपुर की युवा नाट्य संस्था नाट्यांश ने नुक्कड़ नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ का मंचन किया। वर्तमान में पर्यावरण की नाजु़क हालात को देखते हुए पेड़ो को बचाने एवं पेड़ो को लगाने का संदेश दिया। नाट्यांश द्वारा आयोजित यह नुक्कड़ नाटक व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पर्यावरण को पहुँचाई गई हानियो पर आधारित है।

मानव जाति सभी कुछ जानते हुए भी प्राकृतिक संप्रदाओं का शोषण कर रही है तथा इस शोषण से भविष्य मे आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से अनजान बनी हुई है। मानव जाति की इसी सोई सोच को बदलने के लिए और लोगो को जागृत करने के लिए नुक्कड़ नाटक का प्रभावी मंचन किया गया। नाटक मंचन फतेहसागर की पाल पर हुआ।

नुक्कड़ नाटक के साथ ही कलाकारो ने पर्यावरण को बचाने से संबंधित सवालों को समाज के समक्ष रखा। साथ ही दर्शको से पर्यावरण के रक्षक, पेडो़ को बचाने एवं नये पेड़ लगाकर उनके बड़े होने तक पेड़ो की देखभाल का संकल्प लिया और सप्ताह में एक दिन पेट्रोल, प्लास्टिक एवं प्रदुषण जनित वस्तुओं का उपयोग नही करने का आग्रह किया।

इस नुक्कड़ नाटक के संयोजक अशफाक नुर ख़ान पठान ने बताया की नाटक लेखन का कार्य अमित श्रीमाली एंव स्वयं अशफाक नुर ख़ान ने मिल कर किया है। नाटक के कलाकारों में मोहम्मद रिज़वान मंसुरी, शुभम शर्मा, संदीप शिवम, मृदूल गमेती, रिना अहारी, नेहा कोटेड, खुशवंत अहारी, अमित श्रीमाली एंव अशफाक नुर ख़ान पठान ने इस नाटक में अभिनय किया।

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नाटक का सारांश

नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ चार दोस्तों की कहानी है। जिनमे से तीन दोस्त एक व्यवसाय की योजना बनाते है। ये तीनों दोस्त ऑंक्सीजन मेकिंग फेक्ट्री के फायदे के लिए दुनिया के तमाम जंगल एंव पेडों को तबाह करने की योजना बनाते है। किन्तु इनका चौथा दोस्त इन तीनों को पेड़ों के महत्व के बारे में समझाता है। साथ ही बिना पेड़ों के भविष्य की एक झलक भी दिखाता है। बिना पेड़ों के भविष्य को देखने के बाद तीनों दोस्त पेड़ों को काटने के बारे मे सोचना छोड़कर पेड़ों को बचाने के बारे मे सोचना शुरू कर देते है।

 

 

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