गहलोत ने खरीदा फतहसागर!!!

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शायद हिट्लर के बाद दुनिया ने ऐसी तानाशाही नही देखी होगी जो कल उदयपुरवासियों को देखनी और सहनी पड़ी| मौका था माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उदयपुर दौरा| सरकार की तानाशाही का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की बस उनके (गहलोत के) सुखद रात्रि विश्राम के लिए उदयपुर के जग प्रसिद्ध फतहसागर झील पर आमजन के वाहनो का प्रवेश निषेध कर दिया गया| इस कारण फतहसागर जाने वालों को काफ़ी दिक्कतें पेश आई, या तो उन्हे वापस रवाना होना पड़ा या अपने वाहनों को दूर खड़ा कर पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा|

इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के कारण फतहसागर पर मुंबइया बाज़ार चलाने वालों को भी काफ़ी आर्थिक नुकसान हुआ क्यूंकी लोगों ने पैदल आने की हिम्मत नही जुटाई और दुकानदारों का सारा खाने का सामान यूँही बर्बाद हुआ| शाम से ही वहाँ वाहनों का प्रवेश रोक देने के कारण पूरा फतहसागर वीरान रहा| कुछ पैदल लोग और भारी पुलिस बल के अलावा सिर्फ़ पार्टी विशेष के कार्यकर्ता और उनके वाहन ही नज़र आए|

हद तो तब हुई जब हमारे संवाददाता ने वहाँ मौजूद एक ट्रॅफिक पुलिस वाले से पूछा की ये गेट कितनी बजे खुलेंगे, तो आप भी पढ़िए उन जनाब का उत्तर “गेट तो खुलने के लिए ही बंद होते हैं

पता नही इस तरह सरकार और सरकारी कर्मचारी क्या साबित करना चाहते हैं| उन्हे शायद इस बात का अंदाज़ा नही की वे जनता के सेवक हैं, मालिक नही|

आप खुद देखिए फतहसागर के कल के हालात:

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खाली पड़ी कुर्सियाँ।

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कुछ यूँ गुज़ारा दुकानदारों ने खाली समय।

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सुनसान सड़क (रात 8 बजे)

और जो सारा सुरक्षा-बल नेताओं की हिफ़ाज़त में लगता है, वो अगर आम-जन के लिए लगाया जाए तो ज़्यादा भला होगा इस देश का|गहलोत साहब शायद इस बात को भूल गये हैं की इसी जनता ने उन्हे इस कुर्सी पर पहुँचाया है और उन्हीं से इतनी घृणा कि उन्हें फालतू का शोर मानते हुए उन्हे अपने ही पसंदीदा जगह पर भ्रमण से रोका गया| जो सरकारी लवाज़मा नेताओं के जी-हुज़ूरी में लगा रहता है, अगर वो अपने रोज़मर्रा के कार्यों को निपटाए तो शायद सबका भला होगा| और नेताओं के साथ चलने वाली गाड़ियों का पेट्रोल बचाया जाए तो प्रधानमंत्री की बात भी अमल में आ सकती है जिसमे वो लोगों से पेट्रोल बचाने की गुहार करते हैं|

जानिए इस मौके पर लोगों की क्या राय थी:

सारा माल यूँही पड़ा रह गया, आज तो ऐसा लगा जैसे फतहसागर पर कर्फ्यू लगा दिया गया हो| शाम को ही दुकान बंद करनी पड़ी और काफ़ी आर्थिक नुकसान हुआ| क्या मेरा यह नुकसान गहलोत जी भरेंगे?
पंकज साहू
कॉफी विक्रेता 
एक बार सुना था की प्रशासन फतहसागर पर वाहन हमेशा के लिए रोक देगा| तो क्या हमे रोज़ ऐसा ही सहना पड़ेगा जो आज सहना पड़ा? ऐसे तो धंधा ही चौपट हो जाएगा सारा|
अजय वैष्णव
ब्रेड पकोड़ा विक्रेता 
 

बहुत चलना पड़ा और नेता आराम से गाड़ी में घूमते हैं| हम उनके सेवक हैं या वो हमारे, ये समझ से परे है|
सोनल
फतहसागर पर घूमने वाले

Also Read : क्या वाकई आज़ाद हैं हम…!!!

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1 reply
  1. Sonal Jain
    Sonal Jain says:

    We had to walk to reach Mumbaiyya Bazar. This VIP culture suck. We have to face all problem. The so called Janta Ke Sevak enjoy the benefits.

    Reply

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