थियेटर के दीर्घानुभवी कलाकार को सलाम : श्री रिज़वान ज़हीर उस्मान

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थियेटर हमारे देश में व्यावसायिक सिनेमा का सशक्त पहलू है जो वास्तविकता के बेहद करीब है। आज भी अभिनय के मायने जिस तथ्य पर निर्भर करते हैं, उसका मूल आधार थियेटर ही है। अभिनय के इस प्रारूप का कोई सानी नहीं है। इस देश की धरती पर कई उम्दा थियेटर कलाकारो ने जन्म लिया है। उनका नाटक में होना या नाटक से किसी तरह से जुड़ा होना, थियेटर के चाहने वालो को उत्साह से भर देता है। बात थियेटर में सक्षम भूमिकाएं निभा चुकी हस्तियो की हो या नाटक निर्देशक की, ऐसे लोगो का थियेटर के प्रति मनोरंजन जगत को दिया गया योगदान अविस्मरणीय है।ये बात हमारे देश की अच्छी है कि कला के इस क्षेत्र को संजो कर रखा जाता है पूरे सम्मान के साथ किन्तु इसके लिए आगे आई शख्सियतो को भी इतनी शिद्दत से संजो कर रखा जाये तो क्या बात होती।

ऐसे हस्तियो ने थियेटर जगत को अपने हर संभव योगदान से जीवंत किया है और सम्मान भी पाया है। कई मुकाम तो ऐसे भी आये जब उन्होने थियेटर जगत में एक नयी दिशा कायम करते हुए एक मुकाम हासिल किया।

ऐसी ही एक हस्ती का नाम है श्री रिज़वान ज़हीर उस्मान, जो कि विगत 45 वर्षों से थियेटर से जुड़े रहकर न केवल 150 से अधिक नाटको में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं अपितु 50 नाटको का निर्देशन भी कर चुके हैं। इनमें से कई नाटको का विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन भी हो चुका है।

इन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा नाट्य लेखन एवं निर्देशन के लिए ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से नवाज़ा गया है। इन्हें साहित्य अकादमी द्वारा नाटक ‘कल्पना पिशाच’ के लिए ‘देवीलाल सामर नाट्य लेखन पुरस्कार’ तथा अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता (जोधपुर एवं नैनीताल) में नाटक ‘लोमडियाँ’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नाटक का पुरस्कार भी मिल चुका है। इन्होने जनहित में राजस्थान के 18 जिलो में नुक्कड़ नाटको के माध्यम से साक्षरता के लिए भी अपना योगदान दिया है। इनका एक उपन्यास ‘भारत रिपेयरिंग वर्कशॅाप’ भी प्रकाशित हो चुका है।

थियेटर जगत में एक नयी जान फूंक देने वाले ऐसे कलाकारो को अपने जीवन में कई निजी तकलीफो से भी गुजरना पड़ता है, चाहे वो सामाजिक हो या स्वास्थ्य संबंधी, किन्तु इसके बावजूद वे थियेटर को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमेशा कुछ न कुछ अर्पित करते आये हैं।

थियेटर के ऐसे मजबूत स्तंभो को थियेटर से बाहर भी सम्मान और देखभाल की आवश्यकता है।

आज थियेटर की यह मशहूर शख्सियत एक ऐसी बीमारी से संघर्ष कर रही है जिसके लिए इन्हें दुआओं के साथ रुपयो की भी आवश्यकता है।

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श्री उस्मान साहब किडनी की बीमारी से ग्रसित होने की वजह से एक लंबे अरसे से डायलिसिस पर हैं, जिसके इलाज में 4 से 5 हज़ार रुपये प्रति सप्ताह की जरुरत पड़ती है।

जहाँ कुछ लोगो ने उनसे हाथ खींच लिए वहीं कुछ हाथ उनके लिए आगे भी आये। इन्ही लोगो में से हैं कर्माश्रम, नादब्रह्मा, और द मेनेजर, जिन्होने इस महान हस्ती के इलाज का बीड़ा उठाया है। जिसके तहत ये लोग एक कार्यक्रम ‘द डायलिसिस’ का आयोजन ‘विश्व नाटक दिवस’ (27 मार्च) पर करने जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत श्रीमान शिवराज सोनवाल द्वारा निर्देशित नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ का मंचन किया जायेगा। इस कार्यक्रम से अर्जित होने वाली सम्पूर्ण आय उस्मान साहब के इलाज के लिए खर्च की जायेगी।

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News provided by Rekha Sisodia and Amit Shrimali. Composed by Sandeep Upadhyay.

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