ऐसा भी है मेरा भारत : कभी न बयाँ हुई अभिव्यक्ति

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‘हम’ कुछ ऐसा लिखने जा रहे है जो हम, सिर्फ और सिर्फ भारत में ही देख और महसूस कर सकते है. यह एक अनकहा पहलु है जो आप इस देश में आ कर ही जान पाते है और दिल से महसूस कर पाते है ।

भारत – इंडिया – हिन्दुस्तान….और भी कई नाम है मेरे देश के । हम कुछ ऐसा लिखने जा रहे है जो हम, सिर्फ और सिर्फ भारत में ही देख और महसूस कर सकते है । यह एक अनकहा पहलु है जो आप इस देश में आ कर ही जान पाते है और दिल से महसूस कर पाते है । न किताबो में – न इन्टरनेट – न अखबारो में इसका जिक्र होता है । चलिए मैं अल्फाजो से पर्दा हटाता हूँ ।

तेज़ दौड़ती ज़िन्दगी में अपने रोज़मर्रा के रास्ते पर आपने कोई मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा या चर्च तो देखा ही होगा और सड़को पर सरपट दौड़ती हर वर्ग की गाड़ी को भी देखा ही होगा । जरा सोचिये कि हम में से बहुत से लोग होते है जो कितनी ही जल्दी में हो या कितने ही उच्च वर्ग से हो लेकिन मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा या चर्च के आगे सर झुक ही जाता है । यह एक आस्था का अस्तित्व है जो की हर हिन्दुस्तानी के जहन में होता ही होता है… ऐसा है मेरा भारत ।

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हिन्दुस्तान में एक बार ट्रेन का सफ़र कीजिये तो आप इस महसूसियत से गुजरेंगे कि रिश्ते इस देश में कितनी जल्दी अपनी जगह बना लेते है । ट्रेन में बात पहले आपसी जान-पहचान से शुरू होती है फिर परिवार, व्यवसाय से होते हुए कई बार तो संवेदनशीलता की पटरी पर चली जाती है और उस दरमियाँ चाय – पकोड़े और भोजन का दौर आपसी मेल-मिलाप से साझा रूप से चलता रहता है यह सब जानते हुए की बिछड़ेंगे तो शायद किसी रुपये की गड्डी के खुले हुए नोट की तरह… क्यो की सफ़र ख़त्म होने के बाद कोई यहाँ तो कोई वहां, बस याद रह जाती है तो स्मृतियाँ उस सफ़र की… ऐसा भी है मेरा भारत ।

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भारत में जब क्रिकेट का बुखार चढ़ता है तो मिठाई और पटाखो से एक त्यौहार का रूप ले लेता है । एक ऐसा त्यौहार जो की एक धर्म ही का है – क्रिकेट । जिसमें न कोई पूजा है, न नमाज है, न शबद कीर्तन और न ही कोई प्रार्थना है… बस है तो देशप्रेम में सरोबार जज़्बा और जूनून । जब यह बुखार चढ़ता है तो जिस अनजान का हम नाम तक नहीं जानते है उस अनजान से स्कोर पूछना हमारा हक़ सा हो जाता है और वह अनजान भी आपको जवाब जरुर देता है… सही है जी कभी ऐसे बुखार में पड़ के देखिएगा… जरुर कहेंगे की हिन्दुस्तान में जूनून का कोई पैमाना नहीं होता है… ऐसा भी है मेरा हिन्दुस्तान ।

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हिन्दुस्तान में कभी चाय की स्टाल या थड़ी पर चाय पीने का लुत्फ़ लीजिये और थोड़ी देर बैठ कर अपने आसपास के लोगो को बात करते सुनिए । वो एक खुला संवाद का अड्डा होता है जहाँ देश – दुनिया – खेल – फिल्म – परिवार – मनोरंजन – करियर – व्यवसाय और पर्सनल बातें होती है चाय की कुछ चुस्कियो के साथ । लगभग हर तबके का इंसान वहां आता है और कटिंग/ फुल / मलाई मार के/ स्पेशल / कड़क/ मीठी / फीकी चाय की आवाज़ लगता है और वो चाय वाला भी इस मेहमान नवाजी से चाय पकड़ा कर जाता है जैसे आपकी लफ्जो में डूबी बातो को जरुरत थी तो सिर्फ – एक चाय की । ऐसा भी है मेरा भारत ।

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यह देश जरुरतमंद को मदद देने हमेशा ही आगे आया है चाहे वो सड़क पर हुआ छोटा सा एक्सिडेंट हो या कारगिल का युध्द या सुनामी का तूफ़ान । इस देश को मैंने दान करते हुए देखा है – पैसा भी और खून भी । ऐसा भी है मेरा हिन्दुस्तान ।

हर देश में कुछ अच्छाइयाँ और बुराइयाँ होती है सो मेरे देश में भी है और बाकी देशो में भी है लेकिन मैं यहाँ न तो अच्छाइयो का जिक्र कर रहा था और न ही बुराइयो का । आइयेगा अगले जनम भी इसी सरज़मी पर, कुछ बातें फिर हो जायेगी आपसे इसी गर्वपूर्ण मातृभाषा – हिंदी में । फिलहाल लफ्जो को विदा करता हूँ आप की आँखो तक के सफ़र के लिए ।

आपका :

संदीप उपाध्याय

I will be waiting for your responses. Please do write back to me at feedback@udaipurlakecity.com

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