उनको नमन…

republic-day

सादर नमन

इस गणतंत्र पर हर परिवार में बुजुर्ग हैं, दादा-दादी, नाना-नानी, जिन्हें प्रणाम करना हमारा कर्तव्य बनता है और हमारा सौभाग्य भी, लेकिन घर परिवार के बाहर, समाज में भारत के सार्वजानिक जीवन में ऐसे आदमी न के बराबर हो गए हैं पर कुछ अपवाद हैं, जो सम्माननीय अपवाद है.

भारत के उन सब स्वतंत्रता सेनानियो का जो आज भी इस खर्चीली, चमकीली, भडकीली दुनिया में अपनी पुरानी सादगी से, इमानदारी से रहते हैं और अपनी लड़ाई की प्रेरणात्मक यादो से भरपूर आज की समस्याओं से चिंतित विचलित रहते हैं… उनको नमन…

उन माताओं और महिलाओं का जिनके लड़ते बेटो-भाइयो ने, और जिनके बहादुर पतिदेवो ने भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने जान न्योछावर कर दी… उनको नमन…

republic-day-2

उन आदर्शवादी जज और मजिस्ट्रेटो का, उन सब अफसरो का, जिन्होने रिश्वतो की मूसलाधार बारिश में अपने ईमान और अपनी मर्यादा पर, भारत के संविधान, उसकी न्याय पालिका और उसकी सरकार की इज्जत पर इमानदारी कि लडखडाती हुई पर स्वाभिमान की छतरी टिकाये रखी है… उनको नमन…

उन शास्त्रीय कलाकारो को जो हमारी प्राचीन परंपरा के वृक्ष सींचते रहे हैं… उनको नमन…

republic-day-3

उन कारीगरो का जो कि अपने हाथो से, उँगलियो से और आँखो की सूक्ष्म दृष्टि से काम करते हैं, हस्तशिल्पियो के साथ जोड़े जाते हैं, हमारे अथाह सफाई कर्मचारी, जो कि हमारी खुशहाली के लिए खुद दिन-रात गर्दिश से गिरे रहते हैं, उनको नमन…

और उन निडर लोगो का, जो सरकारी और कॉर्पोरेट, और समाज केंद्रित भ्रष्टाचार को चुनौती देते आये हैं, ऐसे लोगो और संस्थाओं को… हमारा नमन…

Article by :

Paridhi Kothari

I have extracted some part of this from an article of a weekly, ‘Shikshak Sandesh‘ and I will be waiting for your responses. Please do write back to me at feedback@udaipurlakecity.com

0 replies

Leave a Reply

Want to join the discussion?
Feel free to contribute!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *